कानून के रखवालों को चाहिए-न्याय

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कानून के रखवालों को चाहिए-न्याय

रांची : जिला बार एसोसिएशन के वकीलों ने समाहरणालय में उपायुक्त और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया  और नारे लगाये.

डीसी मुर्दाबाद, अधिवक्ता एकता जिंदाबाद, जो हमसे टकरायेगा चूर चूर हो जायेगा, जैसे नारे लगते रहे.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवम स्टेट बार काउंसिल के तरफ से  रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ता सोमवार को अपने कार्यक्रम के तहत शांति मार्च करते हुए सिविल कोर्ट से समाहरणालय पहुंचे ।

अधिवक्ता अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपना चाहते थे। पर समाहणालय पहुंचते ही गेट बंद कर दिया गया.। जिससे जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही के नेतृत्व में अधिवक्ता गेट के पास ही धरना पर बैठ गये।

प्रतिनिधी मंडल ने 8 सूत्री ज्ञापन उपायुक्त सूरज कुमार को सौंपा। और अपना धरना प्रदर्शन खत्म किया।

इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष महेंद्र सिंह, सचिव संजय प्रसाद,शकील पाशा,विभाष बनर्जी, अधिवक्ता रमेश जायसवाल, रूपेंद्र नाथ शाहदेव,रासबिहारी गंझू, मुकुल पाठक, कविता कुमारी, प्रदीप नाथ तिवारी, सविता सिंह, मनोज  झा, अरविंद कुमार सिंह, अनिल पराशर, अनूप कुमार लाल, विनोद सिंह, राजेंद्र  कुमार गुप्ता, अजय कुमार तिवारी,सुरेंद्रनाथ गंझू, दीपक कुमार महतो, मदन गंझू, मनीष कुमार मिश्रा, बोयर सिंह नाग,राखोहरि चैधरी, धनिक गुडिया, ठाकुर प्रसाद महतो, विशाल पांडे समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे।

ये हैं माँग।

जिला बार काउंसिल के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि

वकीलों एवं उनके परिजनों को 20 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर, मुफ्त मेडिक्लेम,

वैसे वकील जिनका प्रैक्टिस ठीक-ठाक नहीं चलता उन्हें दस हजार रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति,

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट,

वकीलों के आकस्मिक निधन पर 50 लाख उनके परिजनों को देने की मांग

न्यायालय परिसर या उसके नजदीक अधिवक्ता संघों का भवन हो, अधिवक्ताओ के बैठने की समुचित व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं हो।

केंद्र सरकार अपने बजट में पांच हजार करोड़ की राशि अधिवक्ताओ एवं मुव्वकिलों के कल्याण के लिए आवंटित करे।

सरकार जरूरतमंद अधिवक्ता को घर बनाने के लिए भूखंड की व्यवस्था करे।

कानूनी सेवा प्राधिकार कानून में समुचित संशोधन करते हुए अधिवक्ताओ द्वारा कानूनी सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की जाये।

सभी ट्रिब्यूनल, कमीशन आदि में अधिवक्ताओ की भी बहाली हो।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को शीघ्र लागू किया जाये.

आयुष्मान भारत योजना के तहत अधिवक्ता समाज को भी जोड़ा जाये।

सिविल कोर्ट में सोमवार को अधिवक्ता पहली पाली के बाद न्यायिक कार्यों से अलग रहे।

उन्होंने कहा कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर रणनीति बनाकर आंदोलन की जाएगी।

इस दौरान विभिन्न कोर्ट में बड़ी संख्या में  चल रहे मामलों  का निष्पादन नहीं हो सका। सभी को अगली तारीख दी गयी है। तारा शाहदेव के प्रताड़ना मामले में आज सुनवाई होनी थी, लेकिन अधिवक्ताओं के नहीं होने की वजह से अब इस मामले में 26 फरवरी को सुनवाई होगी. एजेसी एसपी दुबे की अदालत में दो मामलों में गवाही नहीं हो सकी.

 

 

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