जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर हुआ टीकाकरण सत्र का आयोजन

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 बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के टीकाकरण है जरूरीबच्चों और गर्भवती महिलाओं को लगाए गए टीके 

भागलपुर, 26 अगस्त

कोरोना काल में भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहें है। इसी क्रम में जिले में बुधवार को नियमित टीकाकरण सत्र का आयोजन जिले के लगभग 3000 आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर किया गया। इस दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीके लगाए गए. साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों पर आई हुयी गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को स्तनपान की आवश्यकता तथा महत्व के बारे में जानकारी दी गयी।  इसके अलावा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में आरटीई पैकेट का वितरण किया गया. आरटीई ( रेडी टू इट) पैकेट के इस्तेमाल एवं इससे होने वाले लाभ की जानकारी दी गई. साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया गया. गोपालपुर प्रखंड के पचगछिया गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 97 की एएनएम मधुमायकेला मुर्मू ने कहा कि टीकाकरण से पहले गांव के लोगों को इसकी सूचना पहुंचा दी जाती है, ताकि वह सही समय पर आ सके. अभी कोरोना को देखते हुए टीकाकरण के दौरान काफी सावधानी बरती जाती है. आशा फैसिलिटेटर आशा वर्मा ने बताया कि इस केंद्र पर हर बुधवार और शुक्रवार को टीकाकरण अभियान चलाया जाता है. इसमें गांव के बच्चे और गर्भवती व धात्री महिलाएं शामिल होने के लिए आती हैं. आशा ललिता देवी और सेविका कंचन कुमारी ने भी टीकाकरण अभियान में अपना सहयोग दिया.गोपालपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुधांशु कुमार ने कहा कि बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सरकार टीकाकरण अभियान चलाया जाता है. यही वजह है कि इस अभियान को कोरोना काल में भी जारी रखा गया है. एएनएम, आशा व सेविका सावधानी बरतते हुए बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीके लगा रही हैं. साथ ही इनलोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं. इसलिए जरूरी है टीकाकरण:टीकाकरण का तत्काल लाभ है व्यक्ति की प्रतिरक्षा. यह किसी रोग के खिलाफ दीर्घकालिक, कभी-कभी जीवन भर सुरक्षा प्रदान करता है. शुरुआती बाल्यावस्था प्रतिरक्षा अनुसूची में अनुशंसित टीके बच्चों को खसरा, चेचक, न्यूमोकोकल रोग और अन्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. बच्चे ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं, अतिरिक्त टीके उन्हें उन रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं जो किशोरों और वयस्कों को प्रभावित करते हैं. साथ ही उन रोगों से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं जो दूसरे क्षेत्रों में यात्रा करने के दौरान उत्पन्न हो सकते हैं. टीके से बच्चों की होती है सुरक्षा: टीका एक जीवनरक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है. टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें. बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है. संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है. नियमित टीकाकरण कई तरह की बीमारियों से होता है बचाव: शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के रूटीन इम्यूनाइजेशन, उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है. साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके. बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है. टीकाकरण के ये फायदे भी है-रोग प्रतिरक्षण विकसित होता है और उनकी रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ती है-टीकाकरण से बच्चों में कई संक्रामक बीमारियों की वक्त रहते रोकथाम हो जाती है-कुछ टीके गर्भवती महिलाओं को भी लगाए जाते हैं, जिससे उन्हें व होने वाले शिशु को टिटनस व अन्य गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके.

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