तमाम पत्रकार संगठन बिक्रम जोशी मामले एकजुट

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पत्रकार बिक्रम जोशी हत्याकांड में गाजियाबाद पुलिस और उत्तरप्रदेश सरकार घेरे में।

पत्रकार बिक्रम जोशी की हत्या उस वक्त कर दी गयी जब वो भांजी की जन्मदिन की मार्केटिंग कर के वापस लौट रहा था। वजह साफ़ था कुछ दिन पहले उसने अपनी भांजी से छेड़खानी का विरोध किया और लोकल पुलिस में ऍफ़ आई आर भी दर्ज करवाया था।

देश के तमाम पत्रकार और पत्रकार संगठन गाजियाबाद पत्रकार बिक्रम जोशी हत्याकांड से नाराज है सबने जगह जगह अपनी नाराजगी प्रदर्शित किया। पत्रकारों में पुलिसिया ब्यवस्था को लेकर काफी रोष है उनका कहना है की पुलिस और गुंडों में तालमे की वजह ही बिक्रम जोशी हत्याकांड का कारन बना।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक जमीं के धंधे से जुड़े दबंग अपराधी रबी डौन का इलाके में काफी खौफ था। इलाके से कई लोग उसके डर से अपना मकान बेच कर निकल चुके थे और किराय पर रहने वालो ने होना ठिकाना बदल लिए थे। ये सब महज इतिफाक नहीं हो सकता और ना ही ना रातो रात हो सकता है। बिक्रम जोशी की हत्या काण्ड ऐसे समय में हुई जब आठ पोलिकर्मी की बेरहमी से हत्या के बाद प्रशासन और सरकार किसी भी अपराधी के खिलाफ जरा सा चूक होने पर नो सरेंडर सीधे फैसला एट स्पॉट की भूमिका में नजर आ रहे है।

गौर करने वाली बात यह भी है की पत्रकार बिक्रम जोशी हत्याकांड ना होती अगर लोकल थाने ने उनकी शिकायत पर कार्यवाही की होती। जानकारी के मुताबिक।

July 2020 Festivals
1 Wednesday Deva Shayani Ekadashi , Ashadhi Ekadashi
2 Thursday Pradosh Vrat (S)
5 Sunday Guru Purnima , Ashadha Purnima Vrat
8 Wednesday Sankashti Chaturthi
16 Thursday Kamika Ekadashi , Karka Sankranti
18 Saturday Masik Shivaratri , Pradosh Vrat (K)
20 Monday Shravana Amavasya
23 Thursday Hariyali Teej
25 Saturday Nag Panchami
30 Thursday Shravana Putrada Ekadashi

लेकिन नाम न बताने की शर्त पर लोगो का कहना है की बिक्रम मारा है रबी डॉन नहीं और पुलिस तो उसके घर चाय पानी के लिए आती। कल को वो छूट गया तो उनकी जान कौन बचाएगा बिक्रम तो पत्रकार था ऐसे गुंडे और पुलिस से वह टक्कर ले सकता था जब उसकी हत्या हो सकती है तो आम जनता का क्यों नहीं।

हालांकि सरकार ने नौकरी और 10 लाख देने का आश्वासन दिया है परन्तु पत्रकार संगठन ने जल्द से जल्द अपराधियों को गिरफ्तार और सजा देने की मांग की है। परिवार वाले अपराधियों की फांसी की सजा दिलवाना चाहते है।

क्या कहा पत्रकार संघठन डब्लू जे आई प्रमुख नरेंद्र भण्डारी ने – डिमांड है की १ करोड़ दिया जाय और परिवार को सुरक्षा।

एन यु जे आई(राष्ट्रीय महासचीव राँची) ने कहा की पत्रकारो पर बढ़ते हमें को देखते हुए अब जरुरी हो गया है की पत्रकार सुरक्षा क़ानून पर सर्कार गंभीरता पूर्ण विचार करें। साथ ही तत्काल सभी पत्रकारों को स्वस्थ्य बिमा अबिलम्ब उपलब्ध करने की दिशा में कदम उठाया जाए।

उपजा (UPJA) संघठन के महा मंत्री रमेश जैन ने-पुलिस पर सीधे आरोप लगाते हुए पुलिस तंत्र को जिम्मेदार बताया। कहा की जब पुलिस पत्रकार को सुरक्षा नहीं दे सकती तो समझिये पुलिस तंत्र फ़ैल हो चुकी है उसके कोई मायने नहीं।

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दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने- अमलेश राजू से सम्पर्क साधने के प्रयास में हमारे प्रतिनिधि गौरव तंवर जी है सम्पर्क होते ही उनका रूख अस्पस्ट किया जायेगा।

डिजिटल मीडिया एसोसिएशन – पत्रकार दिनदयाल ने चिंता जाहिर करते हुए घटना को दुखद बताय। और तत्काल कार्यवाही की मांग की।

संज्ञान न्यूज़ के एडिटर प्रांजल श्रीवास्त्व ने भी चिंता जाहिर किया और कहा की ऐसे तो लोकतन्त्र की हत्या हो जाएगी। कोई भी पत्रकार नहीं बनाना चाहेगा।

जय भारत चॅनेल के संजीव चौहान के घटना को एक चूनौती कहा।

कोलकाता के दिबाकर शास्त्री- उत्तरप्रदेश के योगी सरकार पर भरोसा से उम्मीद रखते हुए तत्काल न्याय की मांग करते है और पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल भी करते है कहते है की अगर योगी जी जैसे सख्त मुख्या मंत्री के समय में अपराधी पत्रकारों को भी नहीं छोड़ रहे तो आम जनता को कैसे छोड़ेगी अतः सरकार को अपनी साख की चिंता करते हुए तत्काल पीड़ित परिवार को न्याय दे।

क्या कहते है शिल्पांचल के पत्रकार

पत्रकार उत्तम झा ने यूपी के गजियाबाद में पत्रकार की हत्या की सीबीआई जांच की मांग की है। झा ने हत्या को असाधारण माना है। हत्या किसने की? यह मायने नहीं रखता। लेकिन हत्या के पीछे किसका हाथ है? कौन कौन से सफेदपोश लोग इसमें शामिल है? उसे बेनकाब करना जरूरी है। इसलिये इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।

निहाल पासवान
गाजियाबाद के पत्रकार बीकास जोशी जी की हत्या की कडी शब्दो में निंदा करते हुऐ उन सभी अपराधियों को कडी से कडी सजा की मांग करता हूं। मैं ऐसे निंदनीय घटना का हमेशा विरोध करता रहूंगा।

इंद्र देव् प्रसाद निरसा चिरकुंडा पत्रकार संघ अध्यक्ष ने कहा इस हत्या के खिलाफ जनविद्रोह होना चाहिए। क्युकी यह एक सामान्य घटना नहीं। पत्रकार की हत्या सिस्टम की लाचारी का प्रमाण है। बिके हुए पुलिस या डरे हुए पुलिस की हाल बयान करता है प्रश्न ये भी है की बिकाश दुबे के द्वारा हत्याकांड के बाद जिस तरह से बिकाश दुबे का एनकाउंटर किया गया उसके बाद भी बिक्रम जोशी की हत्या दिन दहाड़े सरे आम होता है। ऐसे सरकार को बधाई कैसे दे कामयाब कैसे कहे।

पप्पू जायसवाल का कहना है की हत्या अत्यंत निंदनीय है साथ ही दुखद है सभ्य समाज के लिये हम इसकी कड़ी भर्त्सना करते है

लाली गुप्ता
Gaziyabad ke Patrkar Bikash Joshi ji Ka hatya ham patrkar sab apradhiyo ko dand dile ke rhenge

सोना मंडल

गाजियाबाद पत्रकार विकास जोशी की हत्या पर कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अपराधियों को कड़ी से कड़ी दंड मिले यही मांग रही हूं |

राजेश नागवंशी (राणा) – जस्ट एक्शन नो नो डाइरेक्शन–के फॉर्मूले पर योगी स्टाइल में न्याय की मांग करते हुए अस्पष्ट सब्दो में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कही। ये साफ़ सब्दो में कहा की हलाकि विपक्ष हर मामले में योगी को घेरते है तो ऐसे मामलो में क्यों नहीं। बिकाश दुबे हत्या काण्ड को सभी लोगो ने योगी कानून का नाम दिया क्या यही योगी क़ानून है जो कलम के सिपाहियों की हत्या देखता हो… आखिर एक पोलिसवाले का आपराधिक रेकॉर्डस के आदमी के साथ उठना बैठना क्यों तत्काल जवाब दे।

प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के तरफ से अशोक नवरत्न ने कहा कि पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या दुखद है। काउंसिल कड़ा रुख अपनाएगी। पीसीआई सदस्य ने पत्रकार की हत्या एवं साथ ही पुलिस व प्रशासन की भूमिका की जानकारी प्राप्त की। मांग करते हुए कहा की पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मजबूत कानून एवं पत्रकार बीमा पर केंद्र सरकार से बात करेंगी। उन्होंने पत्रकारों को एकजुट रहने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस शिकायत पर कार्रवाई करती तो विक्रम जोशी की जान बच जाती। उन्होंने मुआवजे की राशि भी बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने की मांग की। साथ ही परिवार को सुरक्षा की भी व्यवस्था हो। पीसीआई सदस्य ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पीसीआई कार्य कर रही है। इस मौके पर पत्रकार अशोक ओझा ने बताया कि पत्रकार विक्रम जोशी की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन मंगलवार 28 जुलाई को कविनगर स्थित चैधरी भवन में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में केवल पत्रकार उपस्थित रहेंगे राजनीतिक दल का कोई कार्यकर्ता या पदाधिकारी मौजूद नहीं रहेगा।

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