Lockdown वाली शिक्षा व्यवस्था ।

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                   ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था 

राजेश नागवंशी (राना)

news4shilpanchal.com लाक डाउन के दौरान स्कूल बंद रहने की वजह से बच्चों की पढ़ाई में असर पड़ रहा है लोगों में चर्चा यह भी है कि सरकारी नियमानुसार 3 महीने की फीस स्कूल नहीं लेगा अतः दोनों परिस्थितियों से निपटने के लिए स्कूल ने एक अलग तरीका अपनाया है ऑनलाइन शिक्षा देने की व्यवस्था कर रहे हैं व्हाट्सएप ग्रुप या ऑनलाइन ऐप। साथ ही सूत्रों अनुसार यह भी जानकारी आया है कि स्कूल अभिभावक पर फिश अदायगी के दबाव बना सकते हैं। जैसा की देखा जा सकता हैं बच्चों को पढाई के नाम पर जिन्दगी मशीन बन चुका था लाक डाउन के कारण बच्चों पर अभिभावक पुरा ध्यान दें रहे हैं जिससे बच्चों मे स्वास्थ्य संबंधी समस्या कम आ रही हैं एवं पढाई के अलावे खेलकूद चित्रकला इत्यादि सिखने मे अभिभावक बच्चों कि मदद मोबाईल एप के सहारे रहे हैं । वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता म है । वहीं कुछ बच्चे शिक्षा व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं ऑनलाइन क्लासेस शुरू कर खेल में व्यस्त हो जाते हैं अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है छात्र जहां पढाई के बहाने शिक्षकों को धोखा दे रहे हैं वहीं अभिभावकों से भी मनमानी कर रहे हैं जबकि अभिभावकों की बड़ी चिन्ता यह है कि बच्चे गलत साईट के चक्कर मे खुद को नुकसान पहुंचा ना दे। लेकिन स्कूल ईस बात को लेकर अपनी पिठ थपथपा रहे है की वे जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं । गौर करे ये वहीं स्कूल हैं जो बच्चों को मोबाईल स्कूल लाने पर परिजनों को लाईन हाजिर और जुर्माना भी लगाने मे गर्व महसुस करने के साथ ही उपस्थिति कम होने के कारण परीक्षा नहीं लेने का नियम बना चुके हैं । लेकिन जब चिकित्सकों से बात किया गया एक नया शब्द उभरकर सामने आया। स्क्रीम टाइम ( कंप्यूटर या मोबाइल के स्क्रीन को दिया गया समयय) इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। आँखे खराब या मानसिक अवसाद का डर है। शिक्षकों और अभिभावकों को समझना होगा कि देर तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना बच्चों के लिए घातक साबित हो सकता है।
शिक्षक पप्पू बर्नवाल
कहा कि छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखने का सार्थक प्रयास है जो कि बदलते दौर कि जरूरत है ।
कुछ स्कूल हेडफोन के जरिए भी पढ़ा रहे जहां तकनीकी में समस्या भी है जो हर स्कूल को ध्यान देने की आवश्यकता है
*Ajay Kumar (Teachers)*
Corona is an emergency situation…..so is the case in the field of education World is rushing to find a vaccine of corona. Professional Educationists in India is rushing to find a vaccine to cure the emergency in the field of education.They have it in the form of ONLINE CLASSES….
THEY HAVE NOT DONE ANY PROACTIVE ARRANGEMENTS FOR THE. I THINK INDIA IS NOT PREPARED FOR THIS AT ALL. .IN COMING DAYS INDIA WILL HAVE TO FIND A BETTER SOLUTION TO THIS EDUCATIONAL EMERGENCY.

Journalist Satish Gupta-
‌लाकडाउन के दौरान आनलाइन शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। सुरक्षा को देखते हुए केन्द्र सरकार ने झूम ऐप्प बंद किया है ।इसके अलावा अन्य कई माध्यमों से आन लाइन पढ़ाई जारी रखी जा सकती है।

*Umesh kr Gupta*
Lockdown k samay online education savi students k liye bahut beneficial hoga kyuki
1) unlog padai se jude rahenge
2) syllabus v kuch complete ho jayega jisse unlogo burden v kam ho jayega
3) or kuch homework v mil jayega jise complete karne m unka time v pass ho jayega
4) is education ka benefit unhe aage dikhai dega
5) padai se continue jude rahenge
6) savi student ko inhe carefully lena chahiye or kuch doubt hone se apne respective subject teacher se puchna chahiye
7) teacher logo ko v jayada samay dena hoga student logo even apna mob no. and whatsapp no. v dena chahiye taki kisi v student ko kisi v topic ho to personally puch sakta hi

Sona Mondal-student
ऑनलाइन स्टडी जहां-जहां स्टार्ट हुआ अभी तक सिर्फ इंग्लिश मीडियम स्कूल का ही नाम आया पर जो बच्चे बंगाली / हिंदी मीडियम में पढ़ते हैं। वहा नही हुआ। जो सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं वह बच्चे ना तो इंटरनेट व्यवहार करना जानते हैं और ना तो उनका फैमिली जानती है वह बच्चे क्या करें।

Krishnakant Sharma -Law student
I am agree with you sir but before starting this classes our Government have to take initiative to improve net speed because every family can’t afford Router in home and invest 600 monthly for net pack.

Article:Rajesh Nagbanshi
News correspondent

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